छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट का फैसला: बच्चे की कस्टडी में पिता का आर्थिक हक नहीं, मां का प्यार सर्वोपरि

Shantanu Roy
18 Jan 2026 11:31 PM IST
हाईकोर्ट का फैसला: बच्चे की कस्टडी में पिता का आर्थिक हक नहीं, मां का प्यार सर्वोपरि
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Bilaspur. बिलासपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट ने बच्चों की कस्टडी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि बच्चे को सौतेली मां से वही प्यार और माहौल नहीं मिल सकता, जो उसे अपनी सगी मां से मिल रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल आर्थिक संपन्नता होने के कारण पिता बच्चे की कस्टडी का हकदार नहीं बन जाता। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने दूसरी महिला के साथ रह रहे एक पिता की याचिका खारिज कर दी। इस मामले में पिता ने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर अपने 7 साल के बेटे की कस्टडी मांगी थी। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बैंच में हुई।

जानकारी के अनुसार, बेमेतरा जिले के कोड़वा निवासी लक्ष्मीकांत की शादी 2013 में हुई थी। उनके दो बेटे हैं। पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद होते रहने के कारण मामला हाईकोर्ट तक पहुँच गया। लक्ष्मीकांत ने 7 साल के बेटे की कस्टडी की मांग करते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। पहले यह मामला फैमिली कोर्ट में आया था, जहां पति ने परिवाद दायर कर बेटे की कस्टडी मांगी थी। फैमिली कोर्ट ने माता-पिता के पक्षों और बच्चे के हित का अध्ययन करने के बाद पत्नी के पक्ष में फैसला दिया और पिता के परिवाद को खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पत्नी ने कहा कि उसका पति बिना तलाक लिए दूसरी महिला के साथ रह रहा है और मंदिर में उससे शादी कर चुका है। पति ने भी यह स्वीकार किया कि उसका दूसरी महिला के साथ प्रेम संबंध है। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे को सौतेली मां से वही प्यार और मानसिक सुरक्षा नहीं मिलेगी, जो उसे अपनी सगी मां से मिल रही है। पिता ने तर्क दिया कि वह आर्थिक रूप से अधिक सक्षम है, जबकि पत्नी के पास आय का कोई साधन नहीं है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि बच्चे का कल्याण केवल आर्थिक संपन्नता से तय नहीं होता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे के मानसिक और भावनात्मक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

हाईकोर्ट ने कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि कस्टडी तय करते समय माता-पिता के कानूनी अधिकारों की तुलना में बच्चे का हित सबसे महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पिता की अपील को खारिज कर दिया। यह निर्णय बच्चों की कस्टडी के मामलों में मानसिक सुरक्षा, भावनात्मक स्वास्थ्य और पारिवारिक स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का उदाहरण है। यह फैसला उन पिता-पिता और परिवारों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा, जो केवल आर्थिक आधार पर कस्टडी का दावा करते हैं। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी संकेत दिया कि बच्चों के साथ पिता या मां की भूमिका केवल वित्तीय नहीं होती, बल्कि स्नेह, प्यार और सुरक्षित वातावरण प्रदान करना सबसे महत्वपूर्ण है।
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